Nagarjun
Description
दुखमोचन एक गाँव की कहानी हैµऐसे एक पिछड़े गाँव की कहानी, जहाँ युगों से निश्चल पड़ी जिंदगी नये युग की रोशनी पाकर धीरे–धीरे जाग रही है । मौजूदा परिवेश में
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प्रकारान्तर से यह देश के हर पिछड़े गाँव के जागने की कहानी है । दुखमोचन में लोकजीवन के चितेरे कथाकार नागार्जुन ने अलग–अलग जातियों और वर्गों में बँटे उस ठेठ देहाती समाज का जीवन्त चित्रण किया है, जो आज भी अभावों और विवशताओं में जीता है । दुखमोचन एक छोटा मगर शक्तिशाली उपन्यास है । इसका नायक ‘दुखमोचन’ नयी युग–चेतना का संवाहक है । अंध रूढ़ियों और पुराने संस्कारों से ग्रस्त समाज में बदलाव लाने के लिए वह जो संघर्ष करता है, उसे कथाकार ने बड़ी मार्मिकता से चित्रित किया है । पीड़ितों और दलितों के रहबर के रूप में दुखमोचन की भूमिका जहाँ मन में प्रेरणा जगाती है, वहीं नित्याबाबू और त्रिजुगी चैधरी जैसे गाँव के इने–गिने सम्पन्न लोगों के फरेबों और कुचक्रों से रोष उत्पन्न होता है ।
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Genres
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Reading Moods
No reading moods specified
Contributors
No contributors specified
Publishing Info
Publisher
Rajkamal Prakashan
Month-Year
Jan, 1999
ISBN
ISBN-13: 9788171788743
ISBN-10: 8171788742
Language
Hindi
No. of Pages
148
Format
Hardcover
Awards & Recognition
No awards specified
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First Reviewed by
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