Vinod Baliya Vimal
Description
अन्न पैदा करना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है जिसमे प्रकृति का समया-अनुकूलता से सीधा संबंध है। आज के दौर में खेती-किसानी विषमताओं से भरी हुई है जिसमें जोखि
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म ज्यादा है। ऊपर से पूंजीवाद ने कृषि को भी अछूता नहीं छोड़ा, वहाँ भी पूंजीवाद ने अपना रंग दिखाना शुरु कर दिया है। किसान के लागत और लाभ में तुच्छ अन्तर होता जा रहा है। जिसका परिणाम लगातार गबरूओं का जाना हो रहा है। गबरू की समस्या व्यक्तिगत नहीं है जिसका हल उसे खुद निकालना है यह तो सर्वभामिक और सर्वहारी है। गबरू के जाने के बाद उसके दो बैलों को भी अभी समस्याओं से दो-चार होना है। किसानों और बैलों दोनो की समस्या आज के दौर में एक समानान्तर लाइन की तरह चलती जाने वाली प्रक्रिया प्रतीत हो रही है। अभी तो माणिक और नीलम का चरित्र चित्रण बाकी ही है।
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Genres
Literary Fiction
Tags
Literature & Fiction
Reading Moods
No reading moods specified
Contributors
No contributors specified
Publishing Info
Publisher
Repro India Limited
Month-Year
Nov, 2020
ISBN
ISBN-13: 9789390287598
ISBN-10: 9390287596
Language
Hindi
No. of Pages
146
Format
Paperback
Awards & Recognition
No awards specified
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First Reviewed by
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