Dhirendra Singh Jafa
Description
जेलर साहब की दिनचर्या अब इन दो अण्डों के इर्द-गिर्द ही सीमित रहने लगी। किस प्रकार से किसी के जाने बग़ैर उबले अण्डे हासिल किये जायें और कितनी जल्दी उनको
...
निगलकर छिलके आदि सबूत रफा-दफा कर दिये जायें। एक-दो बार तो उन्होंने सोचा कि इसी प्रकार क्यों न कबाब का भी इन्तज़ाम किया जाये, परन्तु कबाब की महक शायद जेलरनी ताड़ जायें इसलिए यह ख़तरनाक साबित हो सकता था, और वैसे भी ठण्डा कबाब किस काम का। अपनी हवस में वे कभी-कभी दो अण्डे शाम के टहलने के समय भी ले आते थे। जब बार-बार उनका पेट चलना शुरू हुआ तो जेलरनी ने सवालों की झड़ी लगा दी। तहक़ीक़ात में वे किसी मुकाम पर तो नहीं पहुँच पायीं परन्तु जेलर साहब एकदम सतर्क हो गये।
Read more
Genres
No genres specified
Tags
Literary Criticism
Short Stories
Reading Moods
No reading moods specified
Contributors
No contributors specified
Publishing Info
Publisher
Vani Prakashan
Month-Year
Jan, 2021
ISBN
ISBN-13: 9789389915327
ISBN-10: 9389915325
Language
Hindi
No. of Pages
16
Format
Paperback
Awards & Recognition
No awards specified
Available at
No purchase options available
First Reviewed by
Claim the Book
Are you an author of this book?
Report
Found an issue or correction?