Sarla Ravindra
Description
सरला जी को कभी नहीं लगा कि वो एक लेखिका हैं. फिर भी जो इनकी कहानियाँ पढ़ता है, गुम हो जाता है, रम जाता है इनकी सपनों की दुनिया में. आप भी हो जाएँगे.
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ऐसा नहीं है कि इनकी कहानियों में वे सब द्वंद्व नहीं जो मानव जीवन के अपृथक अंग बन कर कहीं से भी, कभी भी पनप उठते हैं ... नहीं, वो सब विलक्षण इनकी कहानियों में मौजूद हैं, पर सरला जी तो किसी अद्भुत जगह, अपने किसी सुगम उपवन में भटक कर अपने सब गीत रचती हैं, वही गीत जब तक हमारे सामने आते हैं, कहानियों का रूप धारण कर आते हैं. ऐसी कहानियों का संकलन है “दिवास्वप्न.”
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