Dharamveer Bharti
Description
''कुबड़ी-कुबड़ी का हेराना?'' ''सुई हेरानी।'' ''सुई लैके का करबे?'' ''कंथा सीबै!'' ''कंथा सीके का करबे?'' ''लकड़ी लाबै!'' ''लकड़ी लाय के का करबे?'' ''भ
...
ात पकइबे!'' ''भात पकाय के का करबे?'' ''भात खाबै!'' ''भात के बदले लात खाबे।'' और इससे पहले कि कुबड़ी बनी हुई मटकी कुछ कह सके, वे उसे जोर से लात मारते और मटकी मुँह के बल गिर पड़ती। उसकी कुहनियाँ और घुटने छिल जाते, आँख में आँसू आ जाते और ओठ दबाकर वह रुलाई रोकती। बच्चे खुशी से चिल्लाते, ''मार डाला कुबड़ी को! मार डाला कुबड़ी को!'' -इसी पुस्तक से साहित्य एवं पत्रकारिता को नए प्रतिमान देनेवाले प्रसिद्ध साहित्यकार एवं संपादक श्री धर्मवीर भारती के लेखन ने सामान्य जन के हृदय को स्पर्श किया। उनकी कहानियाँ मर्मस्पर्शी, संवेदनशील तथा पठनीयता से भरपूर हैं। प्रस्तुत है उनकी ऐसी कहानियाँ, जिन्होंने पाठकों में अपार लोकप्रियता अर्जित की।
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Genres
Literary Fiction
Tags
Fiction
Reading Moods
No reading moods specified
Contributors
No contributors specified
Publishing Info
Publisher
PRABHAT PRAKASHAN PVT Limited
Month-Year
Jan, 2021
ISBN
ISBN-13: 9789351865537
ISBN-10: 9351865533
Language
Hindi
No. of Pages
186
Format
Paperback
Awards & Recognition
No awards specified
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First Reviewed by
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