Prabha Khetan
Description
स्त्री-जीवन की विडम्बनाओं, उसके शोषण, उत्पीड़न और संघर्षों का जीवन्त दस्तावेज़ है प्रभा खेतान का उपन्यास - ‘छिन्नमस्ता’। उपन्यास की केन्द्रीय पात्र प्रि
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या का सृजन करते हुए प्रभा खेतान ने ख़ूबी के साथ यह स्थापित किया है कि स्त्री चाहे तो सम्पूर्ण विषम परिस्थितियों और विडम्बनाओं को लाँघकर अपने लिए ऐसा मार्ग तलाश सकती है जो उसे सफलता के शीर्ष तक ले जाए। यह उपन्यास शोषित महिलाओं के लिए प्रेरक है। इसमें पीड़ित स्त्रियों को सम्बल प्रदान करने की क्षमता है। ‘छिन्नमस्ता’ युगों से प्रताड़ित नारी के शोषण के विविध आयामों को परत-दर-परत उघाड़नेवाला उपन्यास है जो यह रेखांकित करता है कि घर की सुरक्षित दीवारों के पीछे भी नायिका प्रिया की अस्मत लूट ली जाती है। किन्तु औरत की उत्कट जिजीविषा का परिचय भी ‘छिन्नमस्ता’ में निहित हैं जिसमें प्रभा जैसी शोषित नारी भी अन्ततः अपनी पहचान अर्जित करती है और अपनी सम्पूर्ण संवेदनशीलता के साथ जीती-जागती हुई अपना स्वतन्त्र व्यवसाय स्थापित करती है। घर के सीमित दायरे से मुक्त हो अपने सपनों को सुदूर क्षितिज तक विस्तृत का संघर्ष-स्वप्न है - ‘छिन्नमस्ता’।
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Genres
No genres specified
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Subjects
Reading Moods
No reading moods specified
Contributors
No contributors specified
Publishing Info
Publisher
Rajkamal Prakashan
Month-Year
Jan, 2009
ISBN
ISBN-13: 9788171788880
ISBN-10: 8171788882
Language
Hindi
No. of Pages
191
Format
Hardcover
Awards & Recognition
No awards specified
Available at
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First Reviewed by
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