Krishna Chandra Tripathi, Rohit Michu
Description
यह उपन्यास कई मायनों में विशेष है। पहली विशेषता इसकी यह है कि यह प्रेम के विषय में है, और आज के उन उपन्यासों से भिन्न है जो केवल आलोचक-सन्तोष और ‘पोलि
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टिकली करेक्टनेस’ के फेर में पड़कर निहायत ही अप्रामाणिक अनुभवों के विवरणों से भरे होते हैं। यह उपन्यास समाज से, उसकी कटु सच्चाइयों से भी दूर नहीं, बल्कि अपने पाठ में प्रेम और उसकी पीड़ा के सघन, प्रामाणिक और छू जानेवाले बिम्बों को इतनी ईमानदारी से उकेरता है, कि हमें हमारे वर्तमान समाज में प्रेम की असंभवता स्पष्ट दिखने लगती है। यही सघनता इसकी दूसरी विशेषता है। यह कथा चमत्कार पर निर्भर नहीं है, न यह चौंकानेवाले स्थिति- संयोजन का सहारा लेती है, बस अपनी पीड़ा को कुरेदते हुए, जीवन के साथ मद्धम गति से बढ़ते हुए हमें अपने साथ बनाए रखती है। और तीसरी विशेषता इस उपन्यास की यह है कि यह दो लेखकों की संयुक्त रचना है, दोनों युवा हैं और उनकी यह पहली पुस्तक है। इस औपन्यासिक कृति से हम हमारे समय की उस युवा रचनात्मकता से रू-ब-रू होते हैं जो अपनी पारम्परिक साहित्यिक संवेदना से भी उतनी ही जुड़ी है, जितनी अपने आधुनिक व्यक्ति-बोध से।
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