Suryakant Tripathi Nirala
Description
चतुरी चमार चतुरी चमार में निराला ने विषयवस्तु के अनुरूप ही कहानी का नया रूप आविष्कृत किया है। वे कई बार संस्मरणात्मक ढंग से अपनी बात कहते हैं और अन्त
...
में अपनी कूची के एक स्पर्श से संस्मरण को कहानी में बदल देते हैं। इन कहानियों में उनका गद्य अनावश्यक साज-सँवार से मुक्त होकर नई दीप्ति के साथ सामने आया है। इसमें जितना कसाव है, उतना ही पैनापन भी। इस कहानी-संग्रह में हास्य के कल-कल के नीचे प्रायः करुणा और आक्रोश की धारा बहती रहती है। संक्षेप में कहें तो निराला के विद्रोही तेवर और गलत सामाजिक मान्यताओं पर उनके तीखे प्रहारों ने इस छोटे से संग्रह को हिन्दी साहित्य में बेमिसाल बना दिया है।
Read more
Genres
History
Tags
Literary Criticism
Poetry
Reading Moods
No reading moods specified
Contributors
No contributors specified
Publishing Info
Publisher
Rajkamal Prakashan
Month-Year
Jan, 1984
ISBN
ISBN-13: 9788126718320
ISBN-10: 8126718323
Language
Hindi
No. of Pages
78
Format
Paperback
Awards & Recognition
No awards specified
Available at
No purchase options available
First Reviewed by
Claim the Book
Are you an author of this book?
Report
Found an issue or correction?