Maitreyi Pushpa
Description
‘चाक’ सामन्ती समाज के भीतर व्याप्त हिंसा और स्वार्थों की टकराहट की प्रामाणिक कहानी है। इस समाज का ताना-बाना हिंसा और सेक्स से बना है। मैत्रेयी इन दोनो
...
ं को ही एक कथाकार की निगाह से पात्रों के आचार-विचार और सोच के रूप में प्रभावशाली ढंग से पकड़ती हैं। ‘चाक’ में बिना बड़बोलेपन के उन्होंने गाँव की स्त्री की जिस चेतना का विकास किया है वह उपन्यास-कला पर उनकी पकड़ को रेखांकित करता है। राजेन्द्र यादव जिस लोक-जीवन से हमारी रचनात्मक धारा काफी पहले विमुख हो चुकी थी, उसकी अनेक परतें मैत्रेयी पुष्पा ने खोल दी हैं। मैत्रेयी पुष्पा को उनकी मामूली लेकिन जबरदस्त स्त्रियों के कारण याद किया जाएगा।-- ज्ञानरंजन मैत्रेयी में मानवीय भावों की सघन अन्तरंगता और सम्बन्धों की जटिलता को चित्रित करने की अनोखी क्षमता मौजूद है। -- परमानन्द श्रीवास्तव स्त्री की कथादृष्टि ही नहीं, उसकी शैली और वाक्य-रचना भी पुरुष से भिन्न होती है। इसका प्रमाण ‘चाक’ की कथा-संरचना और कथा-भाषा में दिखाई देता है। ‘चाक’ की कथा एक स्तर पर गद्य में चलती है और इसके साथ दूसरे स्तर पर लोकगीतों में। -- मैनेजर पाण्डेय
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Genres
Literary Fiction
Tags
Fiction
Subjects
Reading Moods
No reading moods specified
Contributors
No contributors specified
Publishing Info
Publisher
Rajkamal Prakashan
Month-Year
Jan, 1997
ISBN
ISBN-13: 9788171785711
ISBN-10: 8171785719
Language
Hindi
No. of Pages
434
Format
Hardcover
Awards & Recognition
No awards specified
Available at
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First Reviewed by
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