बिटुपन दास
Description
चाँदनी की स्वेटर पहने बह चली ये नदी प्रेम, स्मृतियों, आशाओं और एहसासों की एक मधुर काव्य-यात्रा है। इस संग्रह की कविताएँ चाँदनी, नदियों, बादलों, फूलों
...
और धड़कनों की भाषा में दिल की अनकही बातों को व्यक्त करती हैं।हर कविता मानो भावनाओं की धरती पर उगी एक नई फसल है, जहाँ प्रेम कभी नदी बनकर बहता है, कभी चाँदनी बनकर बिखरता है, और कभी ख़्वाबों के पंख लगाकर आसमान छू लेता है।यदि आप शब्दों में सुकून, प्रकृति में प्रेम और भावनाओं में अपना प्रतिबिंब ढूँढ़ते हैं, तो यह पुस्तक आपको अपने साथ एक ऐसे संसार में ले जाएगी जहाँ हर पृष्ठ चाँदनी की नरम रोशनी में भीगा हुआ है।
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