बृजेन्द्र रेही (Brijendra Rehi)
Description
बस यही तो...(लघु कहानियाँ) की अधिकांश कहानियाँ स्त्री-पुरुष संबंधों, कल्पनाओं, इच्छाओं, उम्मीदों, भावनाओं और बनते-बिगड़ते रिश्तों के ताने-बाने में लिपट
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ी हुई हैं। ये कहानियाँ ऐसी भी हैं जो पाठकों को जीवन के किसी न किसी मोड़ की याद दिलाती रहेंगी।
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