Anil ‘Satyapriya’
Description
"05 मई 1965 को ग्राम लोधापुर जनपद आजमगढ़ (उ.प्र.) में जन्म, अंग्रेजी और इतिहास विषय में परास्नातक और अंग्रेजी विषय में शोध उपाधि, मध्य प्रदेश शास
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न के उच्च शिक्षा विभाग के अन्तर्गत 1987 से कार्यरत। अभी शासकीय स्वशासी महाविद्यालय, सीधी में अध्यापन। जाड़े की धूप (1998), बची रहेगी धूप (2003), सोनांचलम् नमामि (2003), हनी इन ए बाउल (2008), दूब और नीला चाँद (2012), पाँचवाँ क्षितिज (2014), मुखौटों के विरूद्ध (2021) और यह कविता संग्रह ‘‘बूँद-बूँद समुद्र’’ प्रकाशित ।“बूँद-बूँद समुद्र“ की कविताएं किसी विचार विशेष से न बँधते हुए जीवन के वाह्याभ्यंतर संबंधों एवं उनमें होने वाले परिवर्तनों की ओर ध्यान खींचती हैं। वे समय की जटिलताओं, विद्रूपताओं एवं समस्याओं से मुठभेड़ करने में ही अपनी पूरी ऊर्जा खत्म नहीं करतीं बल्कि इस अंधेरे समय को लाँघ कर समानांतर मानवीय संसार का सृजन महा मानव बनने की यात्रा पर निकले मनुष्य के लिए करती हैं। फलतः कविताओं में धरती से आकाश तक आवाजाही संभव हो सकी है। इस रूप में कवि सत्यप्रिय जीवन के गहरे अर्थ, सरोकार और उपादेय मूल्य के लिये विपरीतार्थक युग्म भी रखते हैं। इस लिए प्रतिरोध की स्थिति में भी करुणा एवं संवेदनशील व्याप्तियाँ कविताओं में नए संयोग-संबंध एवं भाव स्थितियों का निरूपण करती हैं साथ ही तात्कालिकता के ताप में जीवन के अर्थ और उसके अंतर्विरोधों को समझने में मददगार बनती हैं।
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