Prabhat Tirpathi
Description
आधुनिक समय के किसी और कवि की कविता के सन्दर्भ में, लोकप्रियता का प्रश्न उतना महत्त्वपूर्ण या अहम नहीं है जितना भवानीप्रसाद मिश्र की कविता के सन्दर्भ म
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ें है, या कहें कि बना दिया गया है। बहुत से समीक्षक ऐसे मिल जाएँगे जो उनकी लोकप्रियता को ही उनके काव्य के श्रेष्ठत्व के सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण आधार के रूप में पेश करना चाहेंगे। इसके विपरीत बहुत से लोग ऐसे भी होंगे या हैं जो इस लोकप्रियता के तत्त्व मात्र को ही गम्भीरता के सन्दर्भ में एक बड़ी कमज़ोरी के रूप में पेश करते हैं। पर इसी वजह से उनकी कविता को अगम्भीर और असाहित्यिक खाने में डालकर, उन्हें ‘तथाकथित लोकप्रिय कविता’ के कवि की तरह ही देखना-पढ़ना गलत है। भवानीप्रसाद मिश्र की कविता, हमें इस बात का अवकाश देती है कि हम कविता की लोकप्रियता और लोकोन्मुखता जैसे मुद्दे पर थोड़ा रुककर विचार करें। खासकर इसलिए कि यह उनकी कविता की केन्द्रीय विशेषताओं में से है। उनकी कविता का संसार विविधताओं से भरा है, बेशक इन विविधताओं के बीच एक मूल्यचेतस् एकतानता, एक हॉरमनी भी मौजूद है। इस अर्थ में कि हर रंग की कविता में, उनका मन है। किसी विशेष स्थिति से सम्बद्ध रहते हुए भी, उस स्थिति के पास जाने और खोजने की विकलता के संकेत हर कविता में मौजूद हैं, पर भावबोध की व्यापकता और वैविध्य की यह मौजूदगी, इस बात का साक्ष्य भी है कि उनकी कविता, आत्मविस्तार की अनथक कोशिश करते मन की कविता है। इस चयन में इस तथ्य पर विशेष ध्यान केन्द्रित किया गया है कि पाठक कवि-व्यक्तित्व के बहुआयामी स्वरूप को अपने देश-परिवेश के अनुभवों की जीवन्तता में पहचान और परख सकें। साथ ही यह चेष्टा भी है कि वे युग-विशेष की कविताओं के बीच बिल्कुल ही अलग किस्म की कविता के रूबरू हो सकें।
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