Indra Nath Choudhury
Description
“क्या आज तुलनात्मक साहित्य के पुनर्गठन की आवश्यकता पड़ गयी है। भारतीय साहित्य तथा तुलनात्मक साहित्य से जोड़कर (क) बहुसंस्कृतिवाद (multiculturalism), (
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ख) महानगरीय विश्ववाद (cosmopolitanism), (ग) दलित तथा नारी विमर्श एवं समसामयिक युग की न्यू टेक्नोलॉजी (new technology) के आविर्भाव तथा आलोचनात्मक यथार्थ (critical realism) एवं बहुस्तरीय यथार्थ (multiple levels of reality) के प्रसार के कारण तुलनात्मक साहित्य पर पुनर्विवेचन और उसके स्वरूप का नवनिर्माण आवश्यक हो गया है। रवीन्द्रनाथ टैगोर ने सन् 1906 में कलकत्ते के जातीय शिक्षा परिषद् में भाषण देते हुए कहा था कि बहुभाषीय भारत के लिए विश्व साहित्य को, जिसको टैगोर ने तुलनात्मक साहित्य दृष्टि भी कहा था, अपनाना बहुत ज़रूरी है। इन्हीं विचारों को ध्यान में रखकर भारतीय तुलनात्मक साहित्य : आधुनिक युग, उत्तर-आधुनिक युग, नयी आधुनिकता ग्रन्थ की रचना की गयी है। इसके पहले भाग के अन्तर्गत बारह लेखों द्वारा तुलनात्मक साहित्य के सैद्धान्तिक पक्ष का विवेचन किया गया है। दूसरे भाग के पन्द्रह लेखों में तुलनात्मक साहित्य के दृष्टान्तों द्वारा उसके स्वरूप को स्पष्ट किया गया है।'
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