Ramvilas Sharma
Description
भारतेंदु युग हिंदी साहित्य का सबसे जीवंत युग रहा है ! सामाजिक-सांस्कृतिक-राजनीतिक-आर्थिक हर मुद्दे पर तत्कालीन रचनाकारों ने ध्यान दिया और अपना अभिमत व
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्यक्त किया, जिसमें उनकी राष्ट्रीय और जनवादी दृष्टि का उन्मेष है ! वे साहित्यकार अपने देश की मिटटी से, अपनी जनता से, उस जनता की आशा-आकांक्षाओं से जुड़े हुए थे, जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण उनकी रचनाएँ हैं ! लेकिन उनकी, उनके युग की इस भूमिका को सही परिप्रेक्ष्य में देखने-समझने का प्रयास पहली बार डॉ. रामविलास शर्मा ने ही किया ! वे ही हिंदी के पहले आलोचक हैं, जिन्होंने भारतेंदु-युग में रचे गए साहित्य के जनवादी स्वर को पहचाना और उसका संतुलित वैज्ञानिक मूल्यांकन किया ! प्रस्तुत पुस्तक इसीलिए ऐतिहासिक महत्त्व की है कि उसमें भारतेंदु-युग कि सांस्कृतिक विरासत को, उसके जनवादी रूप को पहली बार रेखांकित किया गया है ! लेकिन पुस्तक में जैसे एक ओर उस युग में रचे गए साहित्य की मूल प्रेरणाओं और प्रवृत्तियों का विवेचन है, वैसे ही दूसरी ओर प्रायः तीन शताब्दियों के भाषा-सम्बन्धी विकास की रूपरेखा भी प्रस्तुत है, जो डॉ. शर्मा के भाषा-सम्बन्धी गहन अध्ययन का परिणाम है !
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