राकेश कुशवाहा
Description
हम हैं इस मिट्टी के छौने हमें कुलांचें भरने दो,
बंद गली के बंद दरबाजे वो घर तुम्हें मुबारक हो । ।
अंधकारमय हो जीवन जिस जाति धर्म के बंधन में,
कितना
...
भी सुन्दर हो, वो तुमको संसार मुबारक हो ।
जहाँ ठेकेदार धर्म के हों, और हो दलाल भगवंता के,
नारी है उपभोग समझते, हो बिचार उस जनता के ।
ऐसे धर्म समाज को मैं, ठोकर मार अभी दूँगा,
लेकिन बेटे की चाहत में, बेटी को विष नहीं दूँगा ।?
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