Dr. Bhawaan Singh Rana
Description
सन् 1857 के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता-संग्राम के विषय में चर्चा करते ही सर्वप्रथम पेशवा नानासाहब का चेहरा आंखों के मध्य घूमने लगता है । पेशवा नानासाहब ह
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ी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रथम सूत्रधार हैं । मातृभूमि की स्वाधीनता के लिये वह जीवन पर्यंत संघर्ष करते रहे । असफलता के बावजूद उन्होंने भारतीय स्वाधीनता के इतिहास में जिस अध्याय की शुरूआत की वह अपने आप में अविस्मरणीय है । उस समय उनके द्वारा प्रज्जवलित ज्योति के भले ही बुझा दिया गया पर इसका अर्थ यह नही था कि वह सर्वदा के लिये बुझ गयी । बल्कि इस ज्योति के आंच ने ही भारत को स्वतंत्रता प्रदान की । इस पुस्तक में लेखक ने नानासाहब के जीवन चरित की अधिकतम सामग्री को संक्षिप्त रूप में देने का सराहनीय प्रयास किया है ।
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Genres
Literary Fiction
Tags
Fiction
Reading Moods
No reading moods specified
Contributors
No contributors specified
Publishing Info
Publisher
Diamond Pocket Books Pvt Limited
Month-Year
Feb, 2022
ISBN
ISBN-13: 9788128817151
ISBN-10: 8128817159
Language
Hindi
No. of Pages
122
Format
Paperback
Awards & Recognition
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First Reviewed by
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