Suryakant Tripathi Nirala
Description
किशोर पाठकों के प्रति दायित्वबोध से भरकर महाकवि ‘निराला’ ने काफी कुछ लिखा है । उनके मन में भारतीय पुराकथाओं के अनेक आदर्श चरित्र थे, जिनको वे किशोर पा
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ठकों तक ले जाना चाहते थे । भक्त ध्रुव उनकी एक ऐसी ही पुस्तक है । भक्त ध्रुव एक पौराणिक आख्यान पर आधारित है, किंतु निराला ने इसमें ध्रुव की चिंता को एक मानवीय अर्थ देने का प्रयास किया है ‘‘गहन अरण्य में एक ओर चिंता में डूबा हुआ एक बालक मन–ही–मन अपने भविष्य की चिंता कर रहा है वह मनुष्य है, मनुष्य का हक लेकर पैदा हुआ है, मनुष्य से मनुष्योचित व्यवहार की आशा रखता है–––तिरस्कार, घृणा, अपमान, अत्याचार, निर्यातन इन पाशविक वृत्तियों के विरोध के लिए आज उसके खून का हरएक बूँद तीव्र गति से उसे कार्य–तत्पर कर रहा है । बालक सोच रहा है इस अत्याचार का उपाय । चिरकाल से मनुष्यजाति, मनुष्यजाति पर जो अत्याचार करती चली आ रही है, इसका कारण और साथ ही इसका प्रतिरोध भी । वह अत्याचार सहने के लिए नहीं आया ।’’ स्पष्ट है कि निराला ने एक पौराणिक आख्यान को नए अर्थ दिए हैं, उसे हमारी आज की चिंताओं से जोड़ा है । अत्यंत प्रांजल भाषा में लिखी गई यह पुस्तक किशोर पाठकों के लिए न केवल रोचक बल्कि प्रेरणाप्रद भी सिद्ध होगी ।
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