Inder Bahadur Khare
Description
गोधन ही भारत का धन है, गोधन पावन तन का मन है जन मन के वैभव का गौरव गोधन भारत का जीवन है; 1939 और शपथ ले, करे प्रतिज्ञा ले स्वतन्त्रता या मर जायें, रण
...
में सोयें ओढ़ तिरंगा या उसको नभ तक फहरायें। 9 अगस्त 1942 कल का दशहरा भारत के इतिहास में स्वर्णाक्षरों से लिखा जावेगा क्योंकि हिन्दुओं के त्योहार पर मुसलमानों ने इतना आदर भाव दिखाया है। आज का मिलन देखकर मेरे प्राण हिल गये हैं और दो एक बार आँसू पोंछना पड़े हैं ना जाने क्यों जी भर-भर आया है, आँखें छलक-छलक उठी हैं। 28 सितम्बर 1944 समझेंगे मुझको जनवादी वंशज रूसी देश-पिता का या सम्बन्धी साम्य चीन का पर इस मन में मान देश का मेरे स्वर में गान देश का। 1950
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Genres
History
Tags
Poetry
Reading Moods
No reading moods specified
Contributors
No contributors specified
Publishing Info
Publisher
Vani Prakashan
Month-Year
Nov, 2020
ISBN
ISBN-13: 9789389012897
ISBN-10: 9389012899
Language
Hindi
No. of Pages
216
Format
Paperback
Awards & Recognition
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First Reviewed by
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