Garima Srivastava
Description
“ ‘आउशवित्ज़ : एक प्रेम कथा’ स्त्री के प्रेम और स्वाभिमान के तन्तुओं से बुने इस उपन्यास के पात्र और घटनाएँ सच्ची हैं, इतिहास इन घटनाओं का मूक गवाह रह
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चुका है। हिटलर की नात्सी सेना द्वारा यहूदियों के समूल ख़ात्मे के लिए बनाये यातना शिविरों में से एक है आउशवित्ज़-जो अब संग्रहालय में तब्दील कर दिया गया है। युद्ध के निशान ढूँढ़ने पहुँची प्रतीति सेन, अपने जीवन को फिर से देखने की दृष्टि आउशवित्ज़ में ही पाती है । प्रतीति कब रहमाना ख़ातून हो उठती है और कब रहमाना ख़ातून प्रतीति-पहचानना मुश्किल है। कथा शिल्प की दृष्टि से प्रोफ़ेसर गरिमा श्रीवास्तव की प्रस्तुति काफ़ी प्रभावशाली है।"
- प्रोफ़ेसर हेइंज वेर्नर वेस्लर, यूनिवर्सिटी ऑफ़ उप्पसला, स्वीडन
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