Manoj Srivastava
Description
आज के भौतिकवादी व उपभोगतावादी युग में हम आत्मिक रूप से कमजोर पड़ते जा रहे हैं। इससे हमारा मनोबल गिर रहा है। मनोबल की कमी के कारण आज हम वह उपलब्धि प्रा
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प्त नहीं कर पा रहे हैं; जिसके हम वास्तविक हकदार हैं। आज प्रत्येक व्यक्ति अपनी मानसिक कमजोरी को दूर करने के लिए जागरूक होकर प्रयास कर रहा है; लेकिन उसको सफलता नहीं मिल रही। आजकल हर बच्चा कहता है कि सकारात्मक सोचें; बाजार में सबसे अधिक पुस्तकें स्वयं-सुधार (सेल्फ इंप्रूवमेंट) की ही बिक रही हैं। लोग तनाव-प्रबंधन के लिए ट्रेनिंग कैंपों में भाग लेते हैं; प्रवचन और लैक्चर सुनते हैं; किंतु उन्हें वांछित लाभ नहीं मिल रहा है।
प्रस्तुत पुस्तक में वर्णित अध्याय हमारे भीतर भाव एवं मनोविकार के मध्य चलनेवाले सकारात्मक विचारों पर केंद्रित हैं। प्रत्येक अध्याय एक-दूसरे से गुँथा है। अतः प्रयास यह किया गया है कि एक लय में रहकर मूल विचार से जुड़ा रहा जाए।
स्वीकार भाव; माफ करना या माफी माँगना; स्वाभिमान होना; क्रोध पर नियंत्रण; शांति व खुशी इत्यादि; वे अवधारणाएँ हैं; जिनके सहारे हम नकारात्मक जीवन से दूर हो जाते हैं; साथ ही सकारात्मक जीवन अपनाकर सफलता अर्जित करते हैं।
यह पुस्तक विकार दूर करके सत्वृत्तियाँ उत्पन्न कर जीवन का उत्कर्ष करने का मार्ग दिखानेवाली अनुपमेय कृति है।
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Genres
Religion & Spirituality
Tags
Body, Mind & Spirit
Inspiration & Personal Growth
Reading Moods
No reading moods specified
Contributors
No contributors specified
Publishing Info
Publisher
Prabhat Prakashan
Month-Year
Jan, 2021
ISBN
ISBN-13: 9789352661091
ISBN-10: 9352661095
Language
Hindi
No. of Pages
166
Format
Hardcover
Awards & Recognition
No awards specified
Available at
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First Reviewed by
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