Rakesh Madhotra
Description
‘अश्याम्' –जीवन सफ़र में आने वाले कई पड़ाव और मिलने वाले कई मुसाफ़िर आपको जाने-अनजाने में बहुत कुछ सिखा कर जाते हैं। इनमें से कुछ आपके अपने होते हैं,
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कुछ पराये होकर भी अपने लगते हैं। और कुछ पराये ही होते हैं, सबका अपना-अपना हिस्सा होता है, जो आपके व्यक्तित्व को सँवारता और बिगाड़ता है। खेलना इंसान के व्यक्तित्व को बनाता व चमकाता है। मगर ‘श्याम’ हर मुश्किल को पार करता हुआ अपने ‘असलम-अंकल' के सपने को साकार करता है और लॉन-टेनिस में अनोखी कामयाबी हासिल करता है। असलम और श्याम के प्यार और स्नेह से उपजा एक नया शब्द जो इस पुस्तक का शीर्षक बनकर हम सबके समक्ष अवतीर्ण होता है-‘अश्याम्। निकल सकती है पत्थर से बूँद पानी की बस शिद्दत से मेहनत का पसीना बहाइये!
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