Osho
Description
“यह जनक और अष्टावक्र के बीच जो चर्चा है, यह अद्भुत संवाद है। अष्टावक्र ने कुछ बहुमूल्य बातें कहीं। जनक उन्हीं बातों की प्रतिध्वनि करते हैं। जनक कहते ह
...
ैं कि ठीक कहा, बिलकुल ठीक कहा; ऐसा ही में अनुभव कर रहा हूं। मैं अपने अनुभव की अभिव्यक्ति देता हूं। इसमें कुछ प्रश्नोत्तर नहीं है। एक ही बात को गुरु और शिष्य दोनों कह रहे हैं। एक ही बात को अपने-अपने ढंग से दोनों ने गुनगुनाया है। दोनों के बीच एक गहरा संवाद है। यह संवाद है, यह विवाद नहीं है। कृष्ण और अर्जुन के बीच विवाद है। अर्जुन को संदेह है। वह नई-नई शंकाएं उठाता है। चाहे प्रगट रूप से कहता भी न हो कि तुम गलत कह रहे हो, लेकिन अप्रगट रूप से कहे चला जाता है कि अभी मेरा संशय नहीं मिटा। वह एक ही बात है। वह कहने का सज्जनोचित ढंग है कि अभी मेरा संशय नहीं मिटा, अभी मेरी शंका जिंदा है; तुमने जो कहा वह जंचा नहीं।”
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Genres
Philosophy
Tags
Philosophy
Hindu
Reading Moods
No reading moods specified
Contributors
No contributors specified
Publishing Info
Publisher
Diamond Pocket Books (P) Ltd.
Month-Year
Jan, 2021
ISBN
ISBN-13: 9788189605797
ISBN-10: 8189605798
Language
Hindi
No. of Pages
330
Format
Paperback
Awards & Recognition
No awards specified
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First Reviewed by
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