महेंद्र रावत
Description
लोक जीवन सदैव से ही द्वंदों से आच्छादित रहा है द्वंदात्मक स्थितियों से घिरा जीवन परम सुख शांति के आस्वादन से वंचित ही रह जाता है जब-जब मनुष्य की प्रज्
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ञा ने उस परम निर्द्वंद अस्तित्व की प्रतीति की है, व अलौकिक दिव्य निर्झर में अवगाहन कर सका है ऐसी ही क्षण और प्रसंग का भावोदय होने पर जो अनुभूतियाँ अन्तरंग में उत्पन्न हुई, उन्हें शब्दाकारर रूप में प्रस्तुत करने का एक विनम्र प्रयास है, आपके सुधि करकमलों में
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