Suryakant Tripathi Nirala
Description
इस उपन्यास में निराला ने अवध क्षेत्र के किसानों और जनसाधारण के अभावग्रस्त और दयनीय जीवन के चित्रण किया है! पृष्ठभूमि में स्वाधीनता आन्दोलन का वह चरण ह
...
ै जब पहले विश्वयुद्ध के बाद गांधीजी ने आन्दोलन की बागडोर अपने हाथों में ली थी! यही समय था जब शिक्षित और संपन्न समाज के अनेक लोग आन्दोलन में कूड़े जिनमें वकील-बेरिस्टर और पूंजीपति तबके के नेता मुख्या रूप से शामिल थे! इस नेतृत्व का एक हिस्सा किसानों-मजदूरों के आन्दोलन को भरने देने के पक्ष में नहीं था! निराला ने इस उपन्यास में इस निहित वर्गीय स्वार्थ का स्पष्ट उल्लेख किया है!
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Subjects
Reading Moods
No reading moods specified
Contributors
No contributors specified
Publishing Info
Publisher
Rajkamal Prakashan
Month-Year
Sep, 2007
ISBN
ISBN-13: 9788126713738
ISBN-10: 8126713739
Language
Hindi
No. of Pages
154
Format
Paperback
Awards & Recognition
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First Reviewed by
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