Krishna Baldev Vaid
Description
प्रख्यात उपन्यासकार कृष्ण बलदेव वैद का यह उपन्यास हमारे नागर–समाज के उस उपेक्षित तबके पर केन्द्रित है जिसकी समस्याओ पर हम संवेदनशील तरीके से कभी बात न
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हीं करते मगर जिसके बिना हमारा हमार काम भी नहीं चल पाता । शहरों के घरों में चैका–बरतन और सफाई इत्यादि करनेवाली नौकरानियों की रोजमर्रा की जिन्दगी और उनकी मानसिकता इसका केन्द्रीय विषय है । एक युवा होती नौकरानी की मानसिक उथल–पुथल को लेखक ने इस उपन्यास में बड़े ही मार्मिक ढंग से चित्रित किया है तथा डायरी के माध्यम से बड़ी कुशलता पुर्वक से इस उपेक्षित वर्ग के साथ–साथ हमारे कुलीन समाज की विडम्बना को भी पहचानने–परखने का अवसर दिया है । प्रवाहपूर्ण भाषा में लिखित यह उपन्यास फ्रायड के उस उपन्यास की याद दिलाता है जो उन्होंने एक युवा होती लड़की की मानसिकता का चित्रण करने के उद्देश्य से डायरी के रूप में लिखा था । यह उपन्यास आरम्भ से ही पाठक की जिज्ञासा को जगाने में सफल है । उपन्यास की नायिका शानो हिन्दी साहित्य का वह चरित्र है जिसे पाठक हमेशा याद रखेंगे ।
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Genres
No genres specified
Tags
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Reading Moods
No reading moods specified
Contributors
No contributors specified
Publishing Info
Publisher
Rajkamal Prakashan
Month-Year
Jan, 2009
ISBN
ISBN-13: 9788126714155
ISBN-10: 8126714158
Language
Hindi
No. of Pages
230
Format
Paperback
Awards & Recognition
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First Reviewed by
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