Dr. Krishna Dutt Paliwal
Description
सप्रसिद्ध आलोचक प्रो. कृष्णदत्त पालीवाल की नई पुस्तक के आलोचनात्मक निबंधों में अज्ञेय के रचनाकर्म को लेकर हिंदी आलोचना में हुई तमाम साहित्यिक; गैर-साह
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ित्यिक बहसों और साहित्य की; राजनीति की चर्चा करते हुए उस पर तर्कसंगत प्रश्न उठाए गए हैं। अज्ञेय के साहित्यिक-सांस्कृतिक अवदान को उद्घाटित करते हुए स्थापित किया गया है कि अज्ञेय के सृजन-चिंतन से किस तरह हिंदी आलोचना में बहसों की शुरुआत हुई तथा समकालीन साहित्य-संवेदना और साहित्यिक परंपरा के अध्ययन-मूल्यांकन की नई आलोचना-संस्कृति का विकास हुआ।
अज्ञेय के निबंधों; भूमिकाओं; स्मरण-लेखों; यात्रा-साहित्य तथा उनके द्वारा आयोजित व्याख्यानमालाओं और यात्रा शिविरों में लेखकों; विद्वानों; कला-मर्मज्ञों के व्याख्यानों का अंतर्पाठ करते हुए इस पुस्तक में दिखाया गया है कि किस प्रकार उन्होंने भारतीय समाज; हिंदी भाषा; साहित्य और संस्कृति को औपनिवेशिक आधुनिकता से मुक्त कराने और भारतीय आधुनिकता को दिशा प्रदान करने का प्रयास किया।
अज्ञेय-साहित्य के अध्येताओं के लिए एक पठनीय पुस्तक।
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Genres
Politics & Social Issues
Tags
Political Science
Reading Moods
No reading moods specified
Contributors
No contributors specified
Publishing Info
Publisher
Prabhat Prakashan
Month-Year
Jan, 2020
ISBN
ISBN-13: 9789352663958
ISBN-10: 9352663950
Language
Hindi
No. of Pages
320
Format
Hardcover
Awards & Recognition
No awards specified
Available at
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First Reviewed by
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