Narendra Maurya, Kumar Unnayan, Surajit Sarkar
Description
ऐसे बसी पिपरिया 1870 के दशक में रेलवे के बिछाये जाने के बाद मध्य भारत में वन्य भूमि के शहरीकरण की प्रक्रिया को दर्शाती है। अगले डेढ़ सौ साल में उत्तर
...
और पश्चिमी दिशाओं से आर्थिक तंगी और अकाल जैसी प्राकृतिक आपदाओं से बचकर आये लोगों ने रेल पटरी के किनारे पिपरिया को बसाया। खेती के लिए जंगल की कटाई और निरन्तर आप्रवासन ने पिपरिया को एक ऐसा रूप दिया जिसे स्थानीय लोग 'मिनीइंडिया' भी कहकर पुकारते हैं। किताब में दर्ज की गयी स्मृतियाँ व मौखिक कहानियाँ शहर बनने से जुड़े स्थानीय लोगों के अनुभवों, जानकारी और समझ को समेटते हुए नयी जीवन पद्धतियों की विकास प्रक्रिया का वर्णन करती हैं। यह कहानियाँ पाठकों के लिए विभिन्न जनजाति, भाषाओं, जातियों और वर्गों के बीच एक नयी गतिशीलता को रेखांकित करती हैं। इन विभिन्नताओं के कारण ही पिपरिया स्वतन्त्रता मिलने व उसके कुछ वर्षों बाद तक समाजवादी विचारों का एक अहम केन्द्र बना रहा।
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Genres
Politics & Social Issues
Tags
Social Science
Reading Moods
No reading moods specified
Contributors
No contributors specified
Publishing Info
Publisher
Vāṇī Prakāśana
Month-Year
Jan, 2022
ISBN
ISBN-13: 9789355181244
ISBN-10: 9355181248
Language
Hindi
No. of Pages
224
Format
Hardcover
Awards & Recognition
No awards specified
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First Reviewed by
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