Rajesh Aggarwal
Description
अहंकार रूपी शत्रु का विरोध सभी करेंगे; लेकिन जहाँ अपने भीतर छिपे बैठे अहंकार रूपी शत्रु को मारने की बात आएगी; सब बगलें झाँकने लगेंगे। क्योंकि किसी-न-क
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िसी रूप में अहंकार रूपी शत्रु हम सभी के अंदर छिपा होता है और जब-तब मौका देखकर सिर उठा लिया करता है। इसका पूरी तरह दमन करना असंभव तो नहीं; लेकिन कठिन जरूर है।
अहंकार का निषेध करना जरा भी कठिन नहीं है। बस सकारात्मक जीवनशैली अपनाकर हम अपने अहंकार पर पूरी तरह काबू पा सकते हैं। हमारे धर्म-शास्त्रों में अहंकार और उससे उपजने वाले कष्ट-क्लेशों को अनेक कथा-कहानियों; वृत्तांतों; संस्मरणों के माध्यम से दिग्दर्शित किया गया है।
प्रस्तुत पुस्तक में अहंकार से उपजनेवाली कुंठा; दुष्प्रभाव व अन्य बुराइयों का वर्णन और उनके निवारण के उपाय सुझाए गए हैं। अनेक पौराणिक कथाओं द्वारा भी अहंकार के निषेध के बारे में बताया गया है। अहंकार की विश्रांति हेतु यह एक उपयोगी पुस्तक है।
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Genres
Self-Help & Personal Development
Tags
Self-Help
Personal Growth
Reading Moods
No reading moods specified
Contributors
No contributors specified
Publishing Info
Publisher
Prabhat Prakashan
Month-Year
Jan, 2020
ISBN
ISBN-13: 9788177214246
ISBN-10: 8177214241
Language
Hindi
No. of Pages
144
Format
Hardcover
Awards & Recognition
No awards specified
Available at
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First Reviewed by
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