Rashtra Bandhu
Description
अभिभावक और शिक्षक बालकों से आदर्श का अनुकरण कराने के लिए रामलीला एवं जीवनियों को नाटकों में परिवर्तित करने-कराने को प्रोत्साहन देते रहे हैं; लेकिन शिक
...
्षा में मनोविज्ञान के प्रवेश ने बच्चों के नाटकों में इन्हें गौण बना दिया है। अब बच्चों की स्वाभाविक चेष्टाओं को नाटक में प्रस्तुत करना महत्त्वपूर्ण हो गया है तथा आधुनिक बोध में स्वाभाविक क्रियाओं की प्रस्तुति आवश्यक है। वीर रस की प्रस्तुति में बच्चों की स्वाभाविक रुचि रहती है। करुण तथा हास्य के कथानकों को बाल नाटकों का विषय बनाने से दर्शक बालकों पर अनुकूल प्रभाव पड़ता है।
बाल नाटक शिक्षा की दृष्टि से बहुत उपयोगी हैं। शैक्षिक पाठ्यक्रमों में इनका प्रवेश कलात्मकता; सरलता और रोचकता उत्पन्न करता है। बच्चे स्वयं रंगमंच तैयार करते हैं; संवाद लिखते-बोलते हैं। यत्किंचित् प्रेरणा देने की दिशा आवश्यक होती है। बाल नाटकों के इस संकलन ‘अब्बा की खाँसी’ में विभिन्न भाव; रस; रंग व तेवर के नाटक संकलित हैं। इनकी भाषा सहज; सरल; रोचक व चुटीली है। इसके लघु वाक्य प्रभावोत्पादक हैं। इनमें बोधगम्यता भी है और संप्रेषणीयता भी। विश्वास है; यह कृति पाठकों को पसंद आएगी।
Read more
Genres
Biography & Memoir
Tags
Biography & Autobiography
Adventurers & Explorers
Reading Moods
No reading moods specified
Contributors
No contributors specified
Publishing Info
Publisher
Prabhat Prakashan
Month-Year
Jan, 2005
ISBN
ISBN-13: 9788188267361
ISBN-10: 8188267368
Language
Hindi
No. of Pages
188
Format
Hardcover
Awards & Recognition
No awards specified
Available at
No purchase options available
First Reviewed by
Claim the Book
Are you an author of this book?
Report
Found an issue or correction?