Dr. Bhartendu Gautam, Dr. Vikas Kumar Sharma
Description
आज हम तकनीकी, सूचना प्रौद्योगिकी एवं वैश्वीकरण के आधुनिक दौर में हैं। तकनीकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी के बढ़ते प्रभाव के कारण ही उदारीकरण, निजीकरण एवं वै
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श्वीकरण की नवीन विश्व व्यवस्था में वसुधैव कुटुंबकम की अवधारणा सच्चे अर्थों में सार्थक नजर आ रही है। इसके प्रभाव के कारण ही आज विश्व के राष्ट्र एक दूसरे के बहुत नजदीक आ गए है। तकनीकी के बढ़ते प्रभाव के कारण विश्व के राष्ट्र एक-दूसरे के नजदीक तो आ गए हैं लेकिन इसी वैश्वीकरण के परिणामस्वरूप न केवल राष्ट्रों के समक्ष आंतरिक अपितु अनेकों वैश्विक चुनौतियां भी उभर कर सामने आई है। वर्तमान आधुनिक परिवेश में पर्यावरणीय मुद्दे, सामाजिक स्वरूप, आर्थिक व्यवस्था, राजनीति व्यवस्था, समाज का सांस्कृतिक परिवेश, अंतरराष्ट्रीय राजनीति एवं राष्ट्रों के मध्य आपसी संबंध जैसी सभी व्यवस्थाओं का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। समकालीन वैश्विक मुद्दे मानव सभ्यता के बदलते विभिन्न आयामों का ही परिणाम है।
प्रस्तुत पुस्तक ’’आधुनिक वैश्विक चिंतन की दशा व दिशा’’ वर्तमान विश्व के समक्ष उभरती चुनौतियों के विश्लेषण एवं समाधान के उपाय सुझाने का एक सार्थक प्रयास है। वर्तमान वैश्विक संदर्भ पर आधारित यह पुस्तक अपनी विषय शैली, तथ्यात्मकता, आधुनिकता एवं सारगर्भित सुझावों की दृष्टि से समीचीन एवं उपयोगी हैं। इस पुस्तक में विभिन्न विषयों के विद्वानों के द्वारा प्रदत्त तथ्यात्मक व उपयोगी आलेख एवं सुझाव, संबंधित समस्याओं को हल करने में सार्थक सिद्ध होंगे। इस पुस्तक के माध्यम से वर्तमान में राष्ट्रां की आंतरिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दे, नागरिक समाज का नवीन स्वरूप, नई विश्व-व्यवस्था में मानवाधिकारों का पुनरागमन, शासन व्यवस्थाओं के बदलते आयाम आदि सभी विषयों पर अध्येताओं के दृष्टिबोध को समृद्ध करने का प्रयास किया गया है। इस पुस्तक का अध्ययन सुधी पाठकों के लिए इन सभी आयामों की आलोचनात्मक व्याख्या करने में भी सहायक सिद्ध होगा। यह पुस्तक ज्ञान के विविध मानकों की कसौटी पर भी सभी को आकर्षित करने में सहायक सिद्ध होगी। हमें आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि, यह पुस्तक महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों, शोध छात्रों तथा अध्येताओं के लिए न केवल पठनीय होगी अपितु उनके लिए संग्रहणीय एवं उपयोगी भी सिद्ध होगी।
विद्यादायिनी मां सरस्वती एवं श्रद्धेय गुरूजनों के चरणां में सादर समर्पित
संपादक द्वय
डॉ. भारतेन्दु गौतम
डॉ. विकास कुमार शर्मा
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