डा. श्रीकुमार मुखोपाध्याय
Description
इस पुस्तक में प्राचीन आर्य सभ्यता और संस्कृति के उभरने के कारणों एवं आर्यों की उत्पत्ति के ऐतिहासिक संदर्भ में इसकी खासियतों की प्रस्तुति में एक शोधात
...
्मक कार्य किया गया है। यहाँ प्रस्तुत की गई है कि आर्यकृष्टि द्वारा हिंदुवाद भी दुनिया में सांप्रदायिक समस्याओं का समाधान कैसे बना। यह आर्य प्रवासन पर विवाद (AIT/OIT) को कैसे समाधान की दिशा प्रदान करेगा। यहाँ यह भी देखा गया है कि कैसे इस आर्यकृष्टि महान सभ्यताओं की जननी बनी और आर्य-भारतीय सभ्यता के उभरने में किस प्रकार सकारात्मक ऐतिहासिक असर देखा गया। यहाँ, आर्य-भारतीय सभ्यता के 'विश्व शिक्षा केंद्र' बनने की आलोक में - ईसा मसीह के भारतीय संबंध के कुछ राज़ों को खोजा गया है। यह कृति Indian Knowledge System के लिए एक नए दृष्टिकोण को प्रस्तुत करती है। इसलिए, इस पुस्तक से उत्सुक पाठको के आत्म परिचय और इस संस्कृति के पृष्ठभूमि पर आध्यात्मिक, सामाजिक और अंतरराष्ट्रीय विकास को रोशनी मिलेगी।
इस पुस्तक में चर्चा का विषय हैं:
1 विश्व परिचय
2 सृष्टि का कारण
3 नैसर्गिक विविधता में समानता,
4 क्रमिक विकास के सूत्र
5 मनुष्य का उद्भव
6 आर्य संस्कृति की उत्पत्ति
7 आर्यकृष्टि का विकास
8 क्या आर्य लोग भारतीय हैं?
9 आर्यावर्त - एक विश्वशिक्षा केंद्र
10 विदेशी विद्वानों की नजर में प्राचीन भारत
11 ईशा मसीह के साथ भारत का 'गोपनीय' संयोग
12 आर्यकृष्टि की सफलता का कारण
13 आर्य पथ
14 आर्यवाद की उत्पत्ति के नैसर्गिक सूत्र
15 आर्यवाद - सभी धर्ममतों का उद्गमस्थल
16 आर्यवाद में अमृतत्व का मार्ग
17 आर्यकृष्टि की जीवनीशक्ति
18 आर्यवाद की 'उत्कृष्टता' पर कुछ प्रश्न
19 भारत की अवनति का कारण
20 आर्यकृष्टि का भूमंडलीकरण
21 आर्यायण का कार्यक्रम (IM3)
Read more