संपादक - श्याम सुन्दर महरड़ा
Description
बीते साल को कोई भी याद नहीं करना चाहेगा क्योंकि बीते साल ने अपने एक अलग ही पहचान बनाई है जो आगे आने वाले युगो युगो तक कायम रहेगी जिस तरह से अनजान महाम
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ारी ने अपने पैर वैश्विक स्तर पर फैलाकर बहुत से लोगों को अपने आगोश में ले लिया , अरबों खरबों रुपए की क्षति हो गई और जो इस महामारी के दौर से बच कर निकल गया पर इसका भय उसके दिलोदिमाग में घर कर गया अगर इसका ख्याल भी आए तो रूह कांपने लगती है।
इस महामारी के दौर में जहाँ हर वर्ग को बहुत नुकसान हुआ ही साहित्य के क्षेत्र में उम्मीदों की नई किरणों का उदय हुआ | वह अपनी व्यस्त जिंदगी के कारण जिन लोगों की लेखनी रुक गई थी उन्होंने कोरोनाकाल में लगे लॉकडाउन के कारण घर पर रहने के कारण अपनी लेखनी को फिर से गति दी जिसका सोशल मीडिया ने बहुत तेजी से बढ़ावा दिया , जो साहित्य अपने विलुप्त होने के कगार पर था उसको इतनी गति मिली कि आज विलुप्त होता साहित्य वापस अपनी चरम सीमा की ओर बढ़ रहा है |
सोशल मीडिया पर साहित्य के बढ़ते प्रभाव को देखकर अन्य साहित्यिक संस्थान ने भी अब सभी रचनाकारों को अच्छा प्लेटफार्म देने के लिए प्रयास किया जिसमें बुद्धिजीवी वर्ग एवं रचनाकारों के सहयोग से सफलता की ओर बढ़ रहा है
मैं आगाज कविता-संग्रह में प्रकाशित रचनाओं के रचनाकारों के उज्जवल भविष्य की कामना करता हूँ |
उद्देश्य
छुपी हुई साहित्यिक प्रतिभा को उभारने के लिए अनकहे अल्फाज़ साहित्यिक संस्थान द्वारा समय-समय पर भिन्न भिन्न लेखन प्रतियोगिताएं आयोजित करवायी जाती रही हैं जिसका उद्देश्य श्रेष्ठ रचना एवं रचनाकारों को सम्मान एवं उचित स्थान मिल सके | अपने इसी उद्देश्य को पूरा करने के लिए इंक़लाब साहित्यिक मंच मुंबई के साथ मिलकर कर " आगाज 2021" काव्य प्रतियोगिता का आयोजन किया | इस आगाज कविता-संग्रह में आगाज 2021 प्रतियोगिता में शामिल श्रेष्ठ रचनाओं को स्थान दिया गया है |
- श्याम सुन्दर महरड़ा
संपादक आगाज-कविता-संग्रह, संस्थापक अनकहे अल्फाज
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