Rajendra Yadav
Description
यशस्वी कथाकार-सम्पादक राजेन्द्र यादव की इस किताब में स्त्रियों की मुक्ति की राह में मौजूद अनगिनत गुत्थियों पर लिखे लेखों में अनेक कोणों से विचार किया
...
गया है। बीते लगभग चार दशकों में विभिन्न विचारोत्तेजक मसलों पर स्त्रियों के पक्ष में दी गई दलीलों के साथ-साथ इन लेखों में बार-बार उन पेचीदगियों की तरफ भी इशारा किया गया है, जिन पर हमारा रूढि़बद्ध मन सोचना नहीं चाहता। कहते हैं कि दुनिया अगर चार पहाड़ों के बोझ तले पिस रही है तो औरतों पर पाँच पहाड़ों का बोझ है—पाँचवा पहाड़ पुरुष सत्तात्मक विधान का है। आज जबकि पुनरुत्थानवादी शक्तियाँ भारतीय समाज में बड़े ठस्से के साथ घूम रही हैं, यह छिपा नहीं रह गया है कि धर्म और नैतिकता की आड़ में सबसे ज़्यादा अत्याचार औरतों पर ही हो रहे हैं। भूलना नहीं चाहिए कि धर्म के तालिबान हर युग में औरत की नाकेबन्दी करते आए हैं। इस किताब में दो खंड हैं। पहला खंड स्त्री-दासता के रगो-रेशे उधेड़ते हुए उसके ऐतिहासिक सन्दर्भों की पड़ताल करता है जबकि दूसरे खंड में स्त्री विषयक चुनिन्दा रचनात्मक साहित्य को परत-दर-परत टटोलते हुए उसकी सीमाओं और सम्भावनाओं पर उँगली रखने का जोखिम लिया गया है। पूछने को तो आप पूछ सकते हैं कि यह आदमी की निगाह में औरत नाम की किताब भी तो आखिर एक आदमी की ही लिखी हुई किताब है—एक और पुरुष दृष्टिकोण? जवाब में यही कहना पड़ेगा कि आइए पढक़र देखें...!
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Genres
Research & Essays
Tags
Reference
Reading Moods
No reading moods specified
Contributors
No contributors specified
Publishing Info
Publisher
Rajkamal Prakashan
Month-Year
Sep, 2007
ISBN
ISBN-13: 9788126711239
ISBN-10: 812671123X
Language
Hindi
No. of Pages
260
Format
Paperback
Awards & Recognition
No awards specified
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First Reviewed by
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