Shrilal Shukla
Description
आदमी का ज़हर एक रहस्यपूर्ण अपराध-कथा है। इसकी शुरुआत एक ईष्र्यालु पति से होती है जो छिपकर अपनी रूपवती पत्नी का पीछा करता है और एक होटल के कमरे में जाक
...
र उसके साथी को गोली मार देता है। पर दूसरे ही दिन वह साधारण दीखनेवाला हत्याकांड अचानक असाधारण बन जाता है और घटना को रहस्य की घनी परछाइयाँ ढकने लगती हैं। उसके बाद के पन्नों में हत्या और दूसरे भयंकर अपराधों का घना अँधेरा है जिसकी कई परतों से हम पत्रकार उमाकान्त के साथ गुजरते हैं। घटनाओं का तनाव बराबर बढ़ता जाता है और अन्त में वह जिस अप्रत्याशित बिन्दु पर टूटता है, वह नाटकीय होते हुए भी पूरी तरह विश्वसनीय है। सामान्य पाठक समुदाय के लिए हिन्दी में शायद पहली बार एक प्रतिष्ठित लेखक ने ऐसा उपन्यास लिखा है। इसमें पारम्परिक जासूसी कथा-साहित्य की खूबियाँ तो मिलेंगी ही, सबसे बड़ी खूबी यह है कि कथा आज की सामाजिक-राजनीतिक स्थितियों के बीच से निकली है। इसमें सन्देह नहीं कि यह उपन्यास, जिसे लेखक खुद मनोरंजन-भर मानता है, पाठकों के मनोरंजन के अलावा उन्हें कुछ सोचने के लिए मजबूर भी करता है।
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Genres
Literary Fiction
Tags
Fiction
Reading Moods
No reading moods specified
Contributors
No contributors specified
Publishing Info
Publisher
Rajkamal Prakashan
Month-Year
Sep, 2009
ISBN
ISBN-13: 9788171786657
ISBN-10: 8171786650
Language
Hindi
No. of Pages
167
Format
Paperback
Awards & Recognition
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First Reviewed by
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