Rishi Raj
Description
जिन लोगों ने देश को स्वाधीन कराने का स्वप्न देखा; इसकी कल्पना की और दृढ निश्चय कर अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया; उनका पुण्य स्मरण करना हमारा पुनीत कर्तव
...
्य है। उनके बलिदान को आज की युवा पीढ़ी तक पहुँचाना हमारा परम धर्म है। जिस आजादी की हवा में हम साँस ले पा रहे हैं; अपने लिए; अपने घर-परिवार के लिए कुछ कर पा रहे हैं; इसमें कहीं-न-कहीं उन सभी के बलिदान की सुगंध है। इसलिए इन हुतात्माओं को कोटि-कोटि वंदन-अभिनंदन!
शहीदों से जुडे़ स्थानों पर जाना; उनको समय-समय पर याद करना व उनको श्रद्धांजलि देना; यह हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा होना चाहिए। आनेवाली पीढि़यों को अपने गौरवमयी अतीत व हमारे शूरवीरों के महान् जीवन से परिचय करवाना हम सबका धर्म
बनता है।
राष्ट्र के लिए अपना सर्वस्व अर्पित करनेवाले हुतात्माओं की एक लंबी शृंखला है। उनमें से 50 अमर सपूतों के प्रेरणाप्रद जीवन से पाठकों को परिचित कराने का यह उपक्रम है; जो निश्चित रूप से हर भारतीय को पढ़ना ही चाहिए।
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Genres
Historical Fiction
Tags
Historical
Biography & Autobiography
Reading Moods
No reading moods specified
Contributors
No contributors specified
Publishing Info
Publisher
Prabhat Prakashan
Month-Year
Jan, 2020
ISBN
ISBN-13: 9789387968578
ISBN-10: 938796857X
Language
Hindi
No. of Pages
352
Format
Hardcover
Awards & Recognition
No awards specified
Available at
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First Reviewed by
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