Ashish Kaul
Description
इस पुस्तक के लेखक आशीष कौल प्रबंधन विशेषज्ञ होने के कारण कई नामचीन और नए ब्रांड्स को देश-विदेश में तो स्थापित कर ही चुके हैं, साथ ही इतिहास और समाजशास
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्त्र के विद्यार्थी होने के कारण दोनों की नब्ज टटोलते हुए कहानी कहते रहे हैं। वे कहानियाँ, जो हमारी अपनी होकर भी हमारे पास बची नहीं, वे आशीष पाठकों तक पहुँचाते रहे हैं। अपनी इस सोच को अमली जामा पहनाने के लिए ही आशीष कश्मीर के 5000 साल पुराने इतिहास की शोध से जुटाए तथ्यों के आधार पर किताबों और फिल्मों की शृंखला पर लगातार काम कर रहे हैं। खुद को स्वार्थी बताते हुए वह कहते हैं कि उनका लक्ष्य एक ऐसे बेहतर और सुरक्षित समाज की स्थापना है, जहाँ उनकी माँ, बेटी, पत्नी बेखौफ न सिर्फ रह पाएँ, बल्कि तरक्की में भी योगदान दें। आशीष के लेखन का केंद्र मुख्यत: स्त्री-विमर्श, हौसले और संघर्ष की असरदार कहानियाँ होती हैं, जिन्हें वह नई पीढ़ी तक पहुँचाने के लिए सरल-सुबोध भाषा में रोचक तरीके से प्रस्तुत करते हैं। 1967 में हुए 'परमेश्वरी आंदोलन' की यह कहानी भी उसी क्रम में आपके समक्ष प्रस्तुत है।
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