Dilip M. Salwi
Description
हमारी पृथ्वी का एक नाम ' वसुधा ' भी है । ' वसुधैव कुटुम्बकम् ' भारतीय संस्कृति का उद्घोष है । हमारी वसुधा; जो इनसानों; पशु-पक्षियों और वनस्पतियों का
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घर है; संकट से घिरी है । वातावरण के प्रदूषण ने उसका गला घोंट रखा है । औद्योगिक विकास की गति बढ़ने से; शहरीकरण और वाहनों की बढ़ती संख्या से वायु-प्रदूषण की समस्या अनुभव की जा रही है । पर्यावरण से संबंधित बहुत से मुद्दे हमारी रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े हैं-पानी का बेकार बहना; ऊर्जा खपत; ईंधन खपत; कूड़ा-कचरा; मल-मूत्र निपटान आदि की समस्या । प्रकृति की साझेदारी में वायुमंडल एवं जीवमंडल का एक निश्चित अनुपात है । यह अनुपात जब भी बिगड़ता है; प्रकृति का संतुलन बिगड़ जाता है । यदि मनुष्य कुदरत के साथ अनावश्यक छेड़छाड़ न करे तो विपदाओं मे बचा जा सकेगा ।
सदियों से प्रकृति के प्रति हमारा अगाध स्नेह रहा है । इसीलिए आज भी इस बात की जरूरत है कि हम प्रकृति के बोर में सजग बनें ।
प्रस्तुत पुस्तक पर्यावरण के संबंध में अनेक महत्त्वपूर्ण जानकारियाँ देने के साथ- साथ विषय के प्राति पाठकों में उत्सुकता व जिज्ञासा का भाव भी उत्पन्न करेगी; ऐमा विश्वास है ।
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Genres
Research & Essays
Tags
Reference
Encyclopedias
Reading Moods
No reading moods specified
Contributors
No contributors specified
Publishing Info
Publisher
Prabhat Prakashan
Month-Year
Jan, 2020
ISBN
ISBN-13: 9788177213409
ISBN-10: 8177213407
Language
Hindi
No. of Pages
192
Format
Hardcover
Awards & Recognition
No awards specified
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First Reviewed by
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